
पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर एक बार फिर चर्चा में हैं — इस बार युद्ध या धमकी के लिए नहीं, बल्कि अपने ‘दिव्य उद्देश्य’ को लेकर। ब्रसेल्स में आयोजित एक मीटिंग में उन्होंने खुद को लेकर ऐसा बयान दिया जिसने मीडिया और सोशल मीडिया दोनों में गर्मी ला दी।
राजनीति? नो थैंक्स! “मैं सैनिक हूं, न कि नेता”
बेल्जियम के ब्रुसेल्स में बोलते हुए असीम मुनीर ने स्पष्ट कर दिया कि उन्हें राजनीति में कोई रुचि नहीं है। उन्होंने कहा:
“मुझे तो अल्लाह ने रक्षक बनाकर भेजा है। मैं सेना का एक साधारण सिपाही हूं, और मेरी सबसे बड़ी ख्वाहिश शहादत है।”
ये बयान उस समय आया जब अफवाहें उड़ रही थीं कि वे पाकिस्तान की राजनीतिक सत्ता में एंट्री कर सकते हैं, या राष्ट्रपति पद पर नज़र गड़ाए हुए हैं।
ओहदा नहीं, सेवा चाहिए – बोले फील्ड मार्शल मुनीर
मुनीर ने इस बात को दोहराया कि उन्हें किसी ऊंचे ओहदे का लालच नहीं है। उन्होंने कहा:
“मुझे पद नहीं, जिम्मेदारी चाहिए। मुझे देश की सेवा करनी है, कुर्सी की राजनीति नहीं।”
उनका ये स्टेटमेंट उन आलोचकों को जवाब माना जा रहा है जो उन्हें पाकिस्तान की सत्ता की अगली बड़ी स्कीम का हिस्सा बता रहे थे।
भारत और अफगानिस्तान पर भी चलाया बयान-बाण
मुनीर ने भारत और अफगानिस्तान पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि पाकिस्तान की शांति को “प्रॉक्सी वॉर” के जरिए खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
“हमने बहुत नरमी दिखाई है, लेकिन हमारी मजबूती को कमजोरी समझा जा रहा है।”
इस बयान के बाद एक बार फिर क्षेत्रीय तनाव की चर्चा शुरू हो गई है, खासकर कश्मीर और अफगान बॉर्डर के आसपास।
पाकिस्तान के कर्ज को लेकर दिखाया मिनरल-पॉवर का रास्ता
असीम मुनीर ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर भी बात की और कहा कि:
“हमारे पास मिनरल्स का खजाना है। अगर हमने सही इस्तेमाल किया, तो पाकिस्तान का कर्ज उतार सकते हैं।”
उन्होंने इस प्लान को “आत्मनिर्भर पाकिस्तान” की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
अमेरिका-चीन के बीच ‘बैलेंसिंग एक्ट’ का दावा
विदेश नीति पर बोलते हुए मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान का झुकाव न तो पूरी तरह चीन की ओर है, न ही अमेरिका की ओर।
“हम संतुलन बनाकर चलना चाहते हैं। एक दोस्त के लिए दूसरे को बलिदान नहीं करेंगे।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान को अमेरिका से आर्थिक मदद और चीन से रणनीतिक सहयोग दोनों की जरूरत है।
‘प्रेसिडेंसी’ की खबरें फेक हैं
पाकिस्तान के आंतरिक हलकों में चल रही इस चर्चा पर कि मुनीर राष्ट्रपति बन सकते हैं, उन्होंने खुद स्पष्ट इनकार किया:
“मैं किसी भी राजनीतिक पद का इच्छुक नहीं हूं। ये अफवाहें सरासर गलत हैं।”
उनका ये बयान संभावित सत्ता-परिवर्तन की अटकलों पर फुल स्टॉप लगाने जैसा है।
फील्ड मार्शल या फ्यूचर लीडर?
असीम मुनीर का यह आत्मघोषित “ईश्वरीय मिशन”—रक्षक बनकर पाकिस्तान की सेवा—काफी आकर्षक और विवादास्पद दोनों है।
जहां एक ओर वे खुद को ‘राजनीति से दूर’ बताते हैं, वहीं दूसरी ओर उनके बयान, रणनीतिक संकेत और बढ़ती लोकप्रियता एक अघोषित पावर सेंटर की ओर इशारा करती है।
आख़िर में सवाल यही है—क्या मुनीर वाकई सिर्फ फौजी हैं? या फिर पाकिस्तान की सत्ता का अगला चेहरा तैयार हो रहा है, वो भी खाकी वर्दी के भीतर?
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